इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
न्यायकुसुमाञ्जलि, दसवीं शताब्दी के महान नैयायिक उदयनाचार्य द्वारा रचित, न्याय-वैशेषिक दर्शन का एक महत्त्वपूर्ण ग्रन्थ है। इसका मुख्य उद्देश्य तार्किक युक्तियों के माध्यम से ईश्वर के अस्तित्व को सिद्ध करना है। यह कृति पाँच ‘स्तबकों’ (अध्यायों) में विभाजित है, जिनमें नास्तिक, विशेषकर बौद्ध दार्शनिकों, के तर्कों का खंडन करते हुए ईश्वर को जगत के निमित्त कारण के रूप में स्थापित किया गया है। भारतीय आस्तिक दर्शन में ईश्वर-सिद्धि की परम्परा में इसे एक मील का पत्थर माना जाता है, जो अपनी गहन तार्किकता और शास्त्रीय संवाद शैली के लिए विख्यात है।
फ़ॉर्मेट बदलना
क्या आपको यह फ़ाइल किसी दूसरे फ़ॉर्मेट में चाहिए? इसके लिए आप iLovePDF का इस्तेमाल कर सकते हैं, जो एक बहुत अच्छा ऑनलाइन टूल है।
ई-रीडर पर भेजें
आप Amazon की “Send to Kindle” जैसी फ्री सर्विस का इस्तेमाल करके आसानी से फ़ाइल को अपने डिवाइस पर भेज सकते हैं।
कोई दिक्कत आ रही है?
चेक करें कि आपके ई-रीडर का सॉफ्टवेयर अपडेटेड है। यदि फ़ाइल खराब हो या न खुले, तो कृपया उसे पुनः डाउनलोड करें। फिर भी समस्या हो तो हमसे संपर्क करें।