इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
यह कृति प्रसिद्ध दार्शनिक जॉन स्टुअर्ट मिल के कालजयी ग्रंथ “ऑन लिबर्टी” (On Liberty) के अंतिम अध्याय का हिंदी अनुवाद प्रस्तुत करती है। इस अध्याय में मिल अपने द्वारा प्रतिपादित स्वतंत्रता के सिद्धांतों के व्यावहारिक अनुप्रयोगों पर चर्चा करते हैं। वे व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सामाजिक नियंत्रण के बीच की सीमाओं को स्पष्ट करते हुए बताते हैं कि समाज किस हद तक व्यक्ति के कार्यों में हस्तक्षेप कर सकता है। इसमें व्यापार, शिक्षा, और व्यक्तिगत आचरण जैसे क्षेत्रों में सरकारी हस्तक्षेप की सीमाओं का विश्लेषण किया गया है। यह अनुवाद पाठकों को उदारवादी राजनीतिक दर्शन के एक मूलभूत स्तंभ को समझने का अवसर प्रदान करता है, जो आज भी प्रासंगिक है।
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