इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह पुस्तक अट्ठारहवीं शताब्दी के महान जैन विद्वान और सुधारक पंडित टोडरमल जी के जीवन, व्यक्तित्व और उनके साहित्यिक योगदान का एक गहन विश्लेषण प्रस्तुत करती है। इसमें उनके द्वारा रचित कालजयी ग्रंथ ‘मोक्षमार्ग प्रकाशक’ के महत्व पर विशेष रूप से प्रकाश डाला गया है। यह कृति पंडित टोडरमल जी के तार्किक दृष्टिकोण, आध्यात्मिक गहराई और जैन दर्शन को सरल और सुलभ बनाने के उनके प्रयासों को उजागर करती है। यह उनके जीवन और कार्यों को समझने के लिए एक प्रामाणिक और विस्तृत अध्ययन है।
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