इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
“परातन्त्र साधना पथ” एक आध्यात्मिक कृति है जो तंत्र के ‘परतंत्र’ मार्ग की विवेचना करती है। तंत्र साधना के मुख्य रूप से तीन पथ माने जाते हैं – कौल, मिश्र और समय। ‘परतंत्र’ संभवतः इन्हीं में से किसी एक से संबंधित या एक विशिष्ट साधना पद्धति का नाम हो सकता है। यह पुस्तक उस मार्ग के दार्शनिक सिद्धांतों, उसकी साधना की क्रमिक विधियों, और उसके अंतिम लक्ष्य (जैसे- कुंडलिनी जागरण या शिव-शक्ति का सामरस्य) पर प्रकाश डालती होगी। इसमें गुरु की भूमिका, मंत्र, यंत्र और मंडल के प्रयोग की विस्तृत जानकारी दी गई हो सकती है। यह तंत्र में रुचि रखने वाले गंभीर साधकों के लिए एक मार्गदर्शिका है।
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