इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
परमात्मप्रकाश’ अपभ्रंश भाषा के महान योगी-कवि श्री योगीन्द्रदेव द्वारा रचित एक प्रसिद्ध आध्यात्मिक ग्रंथ है। इसमें आत्मा को ही ‘परमात्मा’ बताते हुए अपने शुद्ध आत्म-स्वरूप को जानने और उसी में लीन होने का उपदेश दिया गया है। यह ग्रंथ दोहों में रचा गया है और यह व्यवहार-नय को छोड़कर निश्चय-नय पर अत्यधिक जोर देता है। यह आत्म-ज्ञान और ध्यान-मार्ग के साधकों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक कृति है।
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