इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
यह पुस्तक पूर्वी (पौर्वात्य) और पश्चिमी (पाश्चात्य) दार्शनिक परंपराओं का एक तुलनात्मक और परिचयात्मक अध्ययन प्रस्तुत करती है। यह एक श्रृंखला (माला) का हिस्सा हो सकती है, जिसमें विश्व के महान दार्शनिकों और उनकी विचारधाराओं को समझाया गया है। इसमें भारतीय दर्शन (जैसे वेदांत, सांख्य) और चीनी दर्शन (जैसे ताओवाद) की तुलना यूनानी दार्शनिकों (जैसे प्लेटो, अरस्तू) और आधुनिक पश्चिमी विचारकों (जैसे कांट, हेगेल) के विचारों से की गई है। पुस्तक का उद्देश्य विभिन्न संस्कृतियों के दार्शनिक चिंतन के बीच समानताएं और अंतर दिखाकर पाठकों को एक वैश्विक दार्शनिक परिप्रेक्ष्य प्रदान करना है।
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