इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
यह पुस्तक प्राचीन भारत की उन्नत कालगणना प्रणाली और विभिन्न पारंपरिक संवत्सरों (कैलेंडरों) के वैज्ञानिक और ऐतिहासिक आधार का विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत करती है। इसमें सूर्य और चंद्रमा की गति पर आधारित विभिन्न पंचांगों, जैसे युगाब्द, विक्रम संवत्, और शक संवत्, की निर्माण विधि और उनके महत्व को समझाया गया है। कृति में दिन, मास, वर्ष और युगों की वैदिक अवधारणाओं का गहराई से विश्लेषण किया गया है। यह दर्शाती है कि प्राचीन भारतीय ऋषियों ने खगोल विज्ञान में कितनी गहन विशेषज्ञता हासिल की थी। यह उन पाठकों के लिए एक ज्ञानवर्धक ग्रंथ है जो भारतीय ज्योतिष, खगोलशास्त्र और पारंपरिक कैलेंडर के पीछे के विज्ञान को समझना चाहते हैं।
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