इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह ‘प्राकृत और अपभ्रंश साहित्य’ के इतिहास और उसकी प्रमुख रचनाओं पर एक अकादमिक ग्रंथ है। इसमें वैदिक संस्कृत के बाद और आधुनिक भारतीय भाषाओं से पहले के इस विशाल और महत्वपूर्ण साहित्य का सर्वेक्षण किया गया है। यह जैन साहित्य (आगम), गाथा सप्तशती, और सिद्धों तथा नाथों के अपभ्रंश दोहों जैसी प्रमुख प्रवृत्तियों और रचनाओं का परिचय देती है। यह भारतीय भाषाओं के विकास को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण कृति है।
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