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प्रवचन रत्नाकर [ खण्ड २ ] [ समयसार गाथा २६ से ६८ तक ] - Pravchan Ratnakara [ Vol. 2 ] [ Samayasara Gatha 26 Se 68 Tak ] - Book
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प्रवचन रत्नाकर [ खण्ड २ ] [ समयसार गाथा २६ से ६८ तक ] – Pravchan Ratnakara [ Vol. 2 ] [ Samayasara Gatha 26 Se 68 Tak ] – Book

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पुस्तक विवरण

यह ‘प्रवचन रत्नाकर’ श्रृंखला का दूसरा खंड है, जिसमें पूज्य कानजी स्वामी के प्रवचन हैं। यह खंड विशेष रूप से जैन अध्यात्म के शिखर ग्रंथ, आचार्य कुन्दकुन्द के ‘समयसार’ की गाथा संख्या 26 से 68 तक पर केंद्रित है। इन प्रवचनों में कानजी स्वामी ने ‘समयसार’ के गूढ़ अर्थ, विशेषकर आत्मा के शुद्ध स्वरूप और निश्चय-व्यवहार नय पर, अपने अनूठे और प्रभावशाली ढंग से प्रकाश डाला है।

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