इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह ‘प्रवचन रत्नाकर’ का नौवां खंड है, जो जैन संत श्री कानजी स्वामी द्वारा आचार्य कुंदकुंद के महान ग्रंथ ‘समयसार’ पर दिए गए प्रवचनों का संकलन है। यह खंड विशेष रूप से ‘समयसार’ की गाथा संख्या 308 से 372 तक की विस्तृत व्याख्या पर केंद्रित है। इन गाथाओं में आत्मा और कर्म के संबंध, बंध और मोक्ष के स्वरूप का गहन दार्शनिक विवेचन है। कानजी स्वामी ने अपने प्रवचनों में इन गूढ़ गाथाओं के रहस्य को सरल और तार्किक ढंग से खोला है, जो आत्म-ज्ञान के साधकों के लिए अत्यंत मूल्यवान है।
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