इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
राजतरंगिणी’ 12वीं सदी में कल्हण द्वारा रचित संस्कृत का एक ऐतिहासिक महाकाव्य है। इसका शाब्दिक अर्थ है ‘राजाओं की नदी’। यह कश्मीर के इतिहास का एक व्यवस्थित और कालक्रमानुसार वर्णन प्रस्तुत करती है, जो इसे भारत का पहला प्रामाणिक ऐतिहासिक ग्रंथ बनाता है। कल्हण ने केवल राजाओं की वंशावली नहीं दी, बल्कि उन्होंने घटनाओं के कारणों, पात्रों के चरित्र और नैतिक पाठों का भी विश्लेषण किया है। उन्होंने अपने लेखन में शिलालेखों, पुराने ग्रंथों और लोक परंपराओं जैसे विभिन्न स्रोतों का उपयोग किया। यह कृति न केवल कश्मीर के इतिहास, बल्कि इतिहास-लेखन की कला का भी एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
फ़ॉर्मेट बदलना
क्या आपको यह फ़ाइल किसी दूसरे फ़ॉर्मेट में चाहिए? इसके लिए आप iLovePDF का इस्तेमाल कर सकते हैं, जो एक बहुत अच्छा ऑनलाइन टूल है।
ई-रीडर पर भेजें
आप Amazon की “Send to Kindle” जैसी फ्री सर्विस का इस्तेमाल करके आसानी से फ़ाइल को अपने डिवाइस पर भेज सकते हैं।
कोई दिक्कत आ रही है?
चेक करें कि आपके ई-रीडर का सॉफ्टवेयर अपडेटेड है। यदि फ़ाइल खराब हो या न खुले, तो कृपया उसे पुनः डाउनलोड करें। फिर भी समस्या हो तो हमसे संपर्क करें।