इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
आचार्य कुन्दकुन्दाचार्य के महान ग्रंथ ‘समयसार’ पर आधारित यह प्रवचन श्रृंखला का दूसरा खंड है। ‘समयसार’ आत्मा की शुद्धता और उसे कर्मों से भिन्न जानने के विज्ञान पर केंद्रित है। इस पुस्तक में, किसी विद्वान आचार्य ने मूल ग्रंथ की गाथाओं की गहन और सुगम व्याख्या की है। इसका उद्देश्य आध्यात्मिक साधकों को भेद-विज्ञान (आत्मा और पर-पदार्थ के बीच का अंतर) को समझने में मदद करना है। यह प्रवचन पाठकों को आत्म-स्वभाव में लीन होने और मोक्ष मार्ग पर दृढ़ता से आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं।
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