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समयसार - कलश (टीका) - Samaysaar- Kalash (Tika) - Book
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समयसार – कलश (टीका) – Samaysaar- Kalash (Tika) – Book

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पुस्तक सार

“समयसार” जैन दर्शन, विशेषकर दिगंबर परंपरा, का एक सर्वोच्च आध्यात्मिक ग्रंथ है, जिसकी रचना आचार्य कुन्दकुन्द ने की थी। यह आत्मा के शुद्ध स्वरूप (शुद्ध नय) का प्रतिपादन करता है। प्रस्तुत पुस्तक ‘समयसार-कलश’ पर एक टीका (commentary) है। ‘समयसार-कलश’ स्वयं आचार्य अमृतचंद्र द्वारा ‘समयसार’ के सार को काव्यात्मक रूप में प्रस्तुत करने के लिए रचे गए संस्कृत श्लोक हैं। यह टीका उन गहन ‘कलशों’ के अर्थ को और अधिक स्पष्ट करती है, उनके दार्शनिक भावों को खोलती है और साधकों को आत्म-स्वभाव में लीन होने की प्रक्रिया को समझने में मदद करती है। यह जैन अध्यात्म के गूढ़ रहस्यों को जानने के इच्छुक गंभीर अध्येताओं के लिए एक अनिवार्य कृति है।

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