इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह पुस्तक ‘सन सत्तावन’ (1857) के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के उन ‘भूले-बिसरे शहीदों’ की वीर गाथाओं को प्रकाश में लाती है, जिन्हें इतिहास में वह स्थान नहीं मिला जिसके वे हकदार थे। इसमें उन आम किसानों, सैनिकों, और स्थानीय नेताओं के बलिदान और शौर्य का दस्तावेजीकरण किया गया है जिन्होंने अपनी मातृभूमि की आजादी के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। यह इतिहास के गुमनाम नायकों को एक सच्ची श्रद्धांजलि है।
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