इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह पुस्तक महर्षि पतंजलि द्वारा रचित ‘योगसूत्र’ (पातंजलदर्शन) पर एक विस्तृत भाष्य का तीसरा खंड है। ‘साङ्गं’ का अर्थ है अंगों सहित, जो यह दर्शाता है कि इसमें योग के सभी पहलुओं पर विचार किया गया है। पतंजलि का योगदर्शन चित्त की वृत्तियों को नियंत्रित करने का विज्ञान है। तीसरा खंड संभवतः ‘विभूति पाद’ पर केंद्रित है, जिसमें योग की उच्चतर अवस्थाओं, जैसे धारणा, ध्यान और समाधि (संयम) और उनसे प्राप्त होने वाली विभिन्न सिद्धियों या विभूतियों का वर्णन किया गया है। यह योग के साधकों के लिए एक गहन मार्गदर्शिका है।
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