इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
यह पुस्तक संस्कृत साहित्य के विशाल और समृद्ध इतिहास को एक ‘कहानी’ के रूप में, यानी सरल, रोचक और प्रवाहपूर्ण शैली में प्रस्तुत करती है। इसमें वैदिक काल से लेकर लौकिक संस्कृत के प्रमुख कवियों और नाटककारों तक की विकास-यात्रा का वर्णन है। लेखक ने कालिदास, भवभूति, भास, बाणभट्ट जैसे रचनाकारों की प्रमुख कृतियों का परिचय और उनकी साहित्यिक विशेषताओं को सुगम भाषा में समझाया होगा। इसका उद्देश्य विशेषज्ञ विद्वानों के बजाय आम पाठकों और छात्रों को संस्कृत साहित्य की गौरवशाली परंपरा से परिचित कराना है। यह संस्कृत के विशाल सागर में प्रवेश करने के लिए एक आकर्षक और सुलभ प्रवेश द्वार की तरह है।
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