इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
यह पुस्तक ‘कल्याण’ पत्रिका के संस्थापक और एक महान संत-हृदय व्यक्ति, हनुमान प्रसाद पोद्दार जी के जीवन और विचारों पर आधारित श्रृंखला का दूसरा खंड है। ‘भाईजी’ के नाम से प्रसिद्ध पोद्दार जी ने भारतीय धर्म और संस्कृति के प्रचार-प्रसार में अतुलनीय योगदान दिया। इस खंड में उनके जीवन के उत्तरार्ध के प्रसंग, उनके द्वारा लिखे गए प्रेरणादायक लेख, और भक्तों के साथ हुए उनके सत्संगों का संकलन हो सकता है। पुस्तक उनके सरल, भक्तिपूर्ण और सेवाभावी व्यक्तित्व को उजागर करती है। यह उन पाठकों के लिए एक प्रेरणा स्रोत है जो एक निस्वार्थ और आध्यात्मिक जीवन जीने की कला सीखना चाहते हैं।
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