इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
यह पुस्तक भारतीय अध्यात्म के तीन स्तंभों – संत, सद्गुरु, और उपनिषद – के बीच के गहरे संबंध और उनकी भूमिका पर एक विवेचनात्मक कृति है। इसमें यह समझाया गया होगा कि उपनिषदों में निहित गूढ़ ब्रह्म-ज्ञान को एक ‘सद्गुरु’ कैसे अपनी अनुभूति और सरल भाषा के माध्यम से शिष्य तक पहुँचाता है, और शिष्य उस ज्ञान को अपने जीवन में उतारकर कैसे ‘संत’ की अवस्था को प्राप्त करता है। पुस्तक में विभिन्न संतों (जैसे- कबीर, नानक) की वाणियों का उदाहरण देते हुए यह दर्शाया गया होगा कि उनकी शिक्षाएं उपनिषदों के सत्य का ही एक व्यावहारिक और भक्तिपूर्ण रूप हैं। यह गुरु-शिष्य परंपरा और श्रुति-ज्ञान के महत्व को रेखांकित करती है।
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