इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
सर्व दर्शन संग्रह’ 14वीं सदी के महान विद्वान माधवाचार्य (विद्यारण्य) द्वारा रचित भारतीय दर्शन का एक अद्वितीय और विश्वकोशीय ग्रंथ है। इस पुस्तक में माधवाचार्य ने अपने समय में प्रचलित सोलह प्रमुख दार्शनिक प्रणालियों का सारांश प्रस्तुत किया है, जिसमें चार्वाक, बौद्ध, जैन, न्याय, वैशेषिक, सांख्य, योग, मीमांसा और वेदांत की विभिन्न शाखाएं (अद्वैत, विशिष्टाद्वैत, द्वैत) शामिल हैं। विशेष बात यह है कि वे प्रत्येक दर्शन को उसके अनुयायी के दृष्टिकोण से प्रस्तुत करते हैं और फिर अंत में अपने अद्वैत वेदांत के दृष्टिकोण से उसका मूल्यांकन करते हैं। यह भारतीय दर्शन के विविध स्कूलों को एक ही स्थान पर समझने के लिए एक अतुलनीय कृति है।
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