इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
“सर्वोदय यात्रा” आचार्य विनोबा भावे के ‘सर्वोदय’ (सबका उदय) और ‘भूदान’ आंदोलन से जुड़ी उनकी यात्राओं का एक जीवंत दस्तावेज़ है। यह पुस्तक विनोबा जी की उन पदयात्राओं का वर्णन करती है जो उन्होंने भारत के गाँवों में घूम-घूम कर अमीर भूमिपतियों से गरीबों के लिए भूमि दान में माँगने के लिए की थीं। इस कृति में उनकी यात्रा के अनुभव, लोगों से हुए संवाद, और सर्वोदय के दर्शन का व्यावहारिक रूप देखने को मिलता है। यह केवल एक यात्रा-वृत्तांत नहीं, बल्कि गांधीवादी सिद्धांतों पर आधारित एक अहिंसक सामाजिक और आर्थिक क्रांति का ऐतिहासिक लेखा-जोखा है, जो प्रेम और करुणा की शक्ति में विश्वास जगाता है।
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