इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
डॉ. हिमांशु शेखर द्वारा रचित यह ग्रंथ भारतीय दर्शन की दो महत्वपूर्ण और परस्पर जुड़ी धाराओं – सांख्य और योग – पर एक विवेचना है। सांख्य दर्शन सृष्टि को ‘पुरुष’ (चेतना) और ‘प्रकृति’ (पदार्थ) के द्वैत के माध्यम से विश्लेषित करता है, जबकि योग दर्शन उस ज्ञान को प्राप्त करने और चित्त की वृत्तियों को नियंत्रित करके मोक्ष (कैवल्य) तक पहुँचने का व्यावहारिक मार्ग प्रदान करता है। इस पुस्तक में शेखर ने इन दोनों दर्शनों के सिद्धांतों को अपनी समझ और व्याख्या के साथ प्रस्तुत किया होगा, ताकि पाठक इस गहन विषय को आसानी से समझ सकें।
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