इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
षोडशकम्’ का अर्थ है ‘सोलह का संग्रह’। यह आचार्य हरिभद्र सूरि द्वारा रचित एक महत्वपूर्ण जैन दार्शनिक ग्रंथ है। इसमें सोलह अलग-अलग प्रकरण या अध्याय हैं, जिनमें से प्रत्येक में जैन दर्शन के किसी एक विशिष्ट विषय (जैसे आत्मा, कर्म, प्रमाण) पर या अन्य दार्शनिक मतों की समीक्षा पर गहन विवेचन किया गया है। यह हरिभद्र सूरि की विशाल विद्वत्ता और समन्वयवादी दृष्टिकोण का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
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