इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह पुस्तक जैन धर्म के चौबीसवें तीर्थंकर, भगवान महावीर के जीवन चरित्र पर केंद्रित है, विशेष रूप से उनके ‘श्रमण’ या तपस्वी जीवन पर। इसमें उनके द्वारा राजसी सुखों का त्याग करने, बारह वर्षों की कठोर साधना करने, कैवल्य ज्ञान प्राप्त करने, और धर्म का उपदेश देकर एक विशाल संघ की स्थापना करने की प्रेरणादायक गाथा का वर्णन है। यह कृति उनके त्याग, तपस्या और आत्म-विजय के आदर्श को पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करती है।
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