इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह पुस्तक जैन धर्म के चौबीसवें तीर्थंकर, भगवान महावीर के जीवन और उनकी शिक्षाओं पर प्रकाश डालती है, विशेष रूप से उनके ‘श्रमण’ (तपस्वी) रूप पर। इसमें उनके राजसी जीवन के त्याग से लेकर कठोर तपस्या, कैवल्य ज्ञान की प्राप्ति और एक समतावादी समाज की स्थापना के लिए उनके धर्म-चक्र प्रवर्तन तक की यात्रा का मार्मिक वर्णन है। यह किताब उनके द्वारा दिए गए अहिंसा, सत्य, अचौर्य, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह के पंच महाव्रतों के सार को समझाती है और पाठकों को आत्म-संयम और आत्म-कल्याण के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करती है।
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