इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह आचार्य पूज्यपाद द्वारा रचित प्रसिद्ध जैन ग्रंथ ‘इष्टोपदेश’ पर एक ‘टीका’ यानी व्याख्या है। ‘इष्टोपदेश’ का अर्थ है ‘प्रिय उपदेश’। यह ग्रंथ मात्र 51 श्लोकों में आत्म-कल्याण के लिए अत्यंत सारगर्भित उपदेश देता है। ब्रह्मचारी शीतल प्रसाद जी की यह टीका इन संक्षिप्त श्लोकों के गूढ़ अर्थों को खोलकर समझाती है, ताकि साधक उनके आध्यात्मिक मर्म को आसानी से ग्रहण कर सकें।
फ़ॉर्मेट बदलना
क्या आपको यह फ़ाइल किसी दूसरे फ़ॉर्मेट में चाहिए? इसके लिए आप iLovePDF का इस्तेमाल कर सकते हैं, जो एक बहुत अच्छा ऑनलाइन टूल है।
ई-रीडर पर भेजें
आप Amazon की “Send to Kindle” जैसी फ्री सर्विस का इस्तेमाल करके आसानी से फ़ाइल को अपने डिवाइस पर भेज सकते हैं।
कोई दिक्कत आ रही है?
चेक करें कि आपके ई-रीडर का सॉफ्टवेयर अपडेटेड है। यदि फ़ाइल खराब हो या न खुले, तो कृपया उसे पुनः डाउनलोड करें। फिर भी समस्या हो तो हमसे संपर्क करें।