इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह पुस्तक महर्षि वेदव्यास के पुत्र और श्रीमद्भागवत महापुराण के परम ज्ञानी वक्ता, ‘श्री शुकदेव जी’ का जीवन चरित्र प्रस्तुत करती है। इसमें उनके जन्म से ही विरक्त और ब्रह्मज्ञानी होने की कथा, उनके द्वारा राजा परीक्षित को भागवत कथा सुनाकर मोक्ष प्रदान करने और उनके वैराग्यपूर्ण जीवन के अन्य प्रेरणादायक प्रसंगों का भक्तिमय वर्णन है। यह कृति एक आदर्श त्यागी और आत्म-ज्ञानी संत के चरित्र को पाठकों के सामने रखती है।
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