इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
“विज्ञान भैरव तंत्र” कश्मीर शैव दर्शन का एक सर्वोच्च और अत्यंत गूढ़ ग्रंथ है। यह भगवान भैरव (शिव) और देवी भैरवी (शक्ति) के बीच एक संवाद के रूप में है, जिसमें देवी 112 प्रश्न पूछती हैं कि परम सत्य को कैसे अनुभव किया जाए। इसके उत्तर में, भैरव चेतना को जागृत करने और परम यथार्थ में प्रवेश करने की 112 ध्यान-विधियाँ (धारणाएँ) बताते हैं। ये विधियाँ अत्यंत व्यावहारिक हैं और श्वास, ध्वनि, प्रकाश, और दैनिक जीवन की सामान्य क्रियाओं पर आधारित हैं। यह किसी दर्शन का वर्णन नहीं, बल्कि सीधे अनुभव में उतरने का एक ‘विज्ञान’ या ‘तकनीक’ है। यह ध्यान के साधकों के लिए एक अमूल्य खजाना है।
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