इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह पुस्तक जगद्गुरु श्री वल्लभाचार्य द्वारा स्थापित ‘पुष्टिमार्ग’ संप्रदाय के दार्शनिक सिद्धांत ‘शुद्धाद्वैत वेदांत’ पर एक गहन ग्रंथ है। इसमें वल्लभाचार्य के ब्रह्म, जगत और जीव संबंधी विचारों की विस्तृत व्याख्या की गई है। यह ग्रंथ मायावाद का खंडन करते हुए यह स्थापित करता है कि ब्रह्म और यह जगत दोनों ही शुद्ध हैं। यह भक्ति को ही मोक्ष का सर्वोच्च साधन मानता है। यह वेदांत दर्शन के अध्येताओं और पुष्टिमार्ग के अनुयायियों के लिए एक महत्वपूर्ण और प्रामाणिक कृति है।
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