इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह ‘श्री अष्टावक्रगीता’ अद्वैत वेदांत का एक अत्यंत उच्च कोटि का और गहन ग्रंथ है। यह राजा जनक और आत्म-ज्ञानी ऋषि अष्टावक्र के बीच एक संवाद के रूप में है। इसमें आत्मा, वास्तविकता, और बंधन-मुक्ति के स्वरूप पर प्रत्यक्ष और बिना किसी लाग-लपेट के उपदेश दिए गए हैं। यह ग्रंथ उन साधकों के लिए है जो ज्ञान-मार्ग की उच्चतम अवस्था में हैं और सीधे आत्म-साक्षात्कार की अनुभूति करना चाहते हैं।
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