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श्री जगद्गुरू पंचचार्य विजय - Shri Jagadguru Panchacharya Vijay - Book
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श्री जगद्गुरू पंचचार्य विजय – Shri Jagadguru Panchacharya Vijay – Book

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पुस्तक सार

यह ग्रंथ वीरशैव (लिंगायत) संप्रदाय के पांच महान आचार्यों, जिन्हें ‘पंचाचार्य’ कहा जाता है, की जीवनियों और उनकी विजयों का वर्णन करता है। इन पंचाचार्यों (रेणुकाचार्य, दारुकाचार्य आदि) को भगवान शिव के विभिन्न मुखों से उत्पन्न हुआ माना जाता है, जिन्होंने पृथ्वी पर वीरशैव धर्म की स्थापना और प्रचार किया। “विजय” शब्द उनकी दार्शनिक बहसों में विजय और उनके सिद्धांतों की स्थापना को दर्शाता है। इस पुस्तक में उनके जीवन की अलौकिक घटनाओं, उनके द्वारा दिए गए उपदेशों, और वीरशैव दर्शन के मूल सिद्धांतों (जैसे- षट्स्थल, अष्टावरण) का भक्तिपूर्ण विवरण होगा। यह वीरशैव अनुयायियों के लिए एक महत्वपूर्ण प्रेरणा-ग्रंथ है।

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