इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
यह मीमांसा दर्शन का एक अत्यंत विद्वत्तापूर्ण और प्रामाणिक संस्करण है। इसमें महर्षि जैमिनि के मूल ‘मीमांसा-सूत्र’ के साथ तीन प्रमुख टीकाएँ शामिल हैं: शबर स्वामी का ‘शाबरभाष्य’, कुमारिल भट्ट का ‘तंत्रवार्तिक’ (जो शाबरभाष्य पर एक विस्तृत व्याख्या है)। यह उस ग्रंथ का दूसरा अध्याय प्रस्तुत करता है। मीमांसा दर्शन मुख्य रूप से वेदों के कर्मकांडीय भाग की व्याख्या करता है। यह संस्करण दर्शन के गंभीर अध्येताओं और शोधकर्ताओं के लिए है, क्योंकि इसमें एक ही विषय पर सूत्र, भाष्य और वार्तिक के माध्यम से गहन तार्किक और शास्त्रीय विचार-विमर्श को एक साथ पढ़ा जा सकता है।
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