इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
श्रीपंचदशी’ चौदहवीं शताब्दी के संत-विद्वान स्वामी विद्यारण्य द्वारा रचित अद्वैत वेदांत का एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण ‘प्रकरण ग्रंथ’ है। इसमें पंद्रह अध्यायों (‘पंचदश’) में अद्वैत दर्शन के गहन सिद्धांतों को तर्कपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से समझाया गया है। ‘सटीका सभाषा’ का अर्थ है कि यह संस्करण मूल संस्कृत श्लोकों के साथ-साथ एक संस्कृत टीका और उसका स्थानीय भाषा (जैसे हिंदी) में अनुवाद और व्याख्या भी प्रस्तुत करता है। यह अद्वैत वेदांत के गंभीर छात्रों के लिए एक व्यापक और सुलभ अध्ययन सामग्री प्रदान करता है।
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