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श्री सप्तभङ्गीमीमांसाप्रकरणम्‌ निक्षेपमीमांसाप्रप्रकरणच्च - Shri Saptabhangimimansaprakaranam nikshepamimansapraprakaranach - Book
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श्री सप्तभङ्गीमीमांसाप्रकरणम्‌ निक्षेपमीमांसाप्रप्रकरणच्च – Shri Saptabhangimimansaprakaranam nikshepamimansapraprakaranach – Book

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पुस्तक सार

यह जैन दर्शन के दो अत्यंत महत्वपूर्ण और गूढ़ तार्किक सिद्धांतों पर एक専門 ग्रंथ है। पहला भाग, “सप्तभंगी-मीमांसा”, जैन दर्शन के ‘स्याद्वाद’ या ‘अनेकांतवाद’ के उस सिद्धांत की व्याख्या करता है जिसके अनुसार किसी भी वस्तु के बारे में सात प्रकार से सापेक्षिक कथन किए जा सकते हैं (जैसे- स्यात् अस्ति, स्यात् नास्ति)। दूसरा भाग, “निक्षेप-मीमांसा”, किसी शब्द के अर्थ को समझने की चार पद्धतियों (नाम, स्थापना, द्रव्य, भाव) का विश्लेषण करता है। यह एक उच्च कोटि का दार्शनिक ग्रंथ है जो जैन न्यायशास्त्र और ज्ञान-मीमांसा के तार्किक आधार को समझने के लिए विद्वानों हेतु अनिवार्य है।

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