इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
“शाण्डिल्य भक्ति सूत्र” भक्ति के मार्ग पर एक महत्वपूर्ण और प्राचीन ग्रंथ है, जिसकी रचना महर्षि शाण्डिल्य ने की थी। यह नारद भक्ति सूत्र के समान ही, भक्ति के स्वरूप, उसके प्रकारों और उसे प्राप्त करने के साधनों की सूत्र-शैली में विवेचना करता है। नारद के विपरीत, जो भक्ति को स्वयं में एक परम लक्ष्य (परम-प्रेमरूपा) मानते हैं, शाण्डिल्य भक्ति को ज्ञान (आत्म-ज्ञान) की ओर ले जाने वाला एक साधन मानते हैं। इस ग्रंथ में भक्ति के विभिन्न पहलुओं जैसे श्रद्धा, प्रेम, और ईश्वर के प्रति समर्पण का गहन दार्शनिक विश्लेषण किया गया है। यह वैष्णव परंपरा और भक्ति आंदोलन के लिए एक foundational text है, जो भक्ति के मार्ग पर चलने वाले साधकों को मार्गदर्शन प्रदान करता है।
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