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श्रीउदयनग्रन्थावलि (तृतीयो भाग) - Shri Udayan Granthawali ( part-3) - Book
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श्रीउदयनग्रन्थावलि (तृतीयो भाग) – Shri Udayan Granthawali ( part-3) – Book

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468 Pages
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पुस्तक सार

यह पुस्तक न्याय-वैशेषिक दर्शन के महान आचार्य उदयनाचार्य (10वीं शताब्दी) के ग्रंथों का संकलन है, और यह उस श्रृंखला का तीसरा भाग है। उदयनाचार्य को न्याय दर्शन को एक सुदृढ़ तार्किक आधार देने और बौद्ध दार्शनिकों के मतों का सफलतापूर्वक खंडन करने का श्रेय दिया जाता है। इस खंड में उनकी किसी महत्वपूर्ण कृति, जैसे- “आत्मतत्त्वविवेक” या “न्यायकुसुमाञ्जलि”, का मूल पाठ और संभवतः उसकी टीका शामिल हो सकती है। ये ग्रंथ ईश्वर की सिद्धि, आत्मा के अस्तित्व और प्रमाणों की मीमांसा जैसे गूढ़ विषयों पर अत्यंत परिष्कृत तार्किक विश्लेषण प्रस्तुत करते हैं। यह भारतीय दर्शन के उच्चतर अध्ययन के लिए एक अनिवार्य ग्रंथ है।

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