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श्री वेणु- गीतम (भक्ति रसकी दार्शनिक मीमांसा ) - Shri Venu -Gitam Bhakti Rasaki Darshnik Mimansa ) - Book
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श्री वेणु- गीतम (भक्ति रसकी दार्शनिक मीमांसा ) – Shri Venu -Gitam Bhakti Rasaki Darshnik Mimansa ) – Book

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पुस्तक सार

“श्री वेणु-गीतम” श्रीमद्भागवत महापुराण के दशम स्कंध का एक अत्यंत मधुर और भक्तिपूर्ण प्रसंग है, जिसमें गोपियाँ भगवान कृष्ण की बांसुरी (वेणु) की ध्वनि सुनकर उनकी लीलाओं का गुणगान करती हैं। यह पुस्तक इस प्रसंग की दार्शनिक मीमांसा प्रस्तुत करती है, जिसमें भक्ति रस के विभिन्न पहलुओं का गहन विश्लेषण किया गया है। लेखक वेणु-गीत के माध्यम से प्रेम, विरह, और ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण की भावना को उजागर करते हैं। यह कृति भक्ति को केवल एक भावनात्मक अनुभव के रूप में नहीं, बल्कि एक गहरे दार्शनिक सिद्धांत के रूप में स्थापित करती है। यह वैष्णव भक्ति साहित्य के मर्म को समझने और कृष्ण-प्रेम के आध्यात्मिक आनंद में डूबने के लिए एक उत्कृष्ट ग्रंथ है।

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