इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
“श्री विवेकचूड़ामणि” (विवेक का चूड़ारत्न) अद्वैत वेदांत के महान आचार्य आदि शंकराचार्य द्वारा रचित एक विश्वप्रसिद्ध प्रकरण-ग्रंथ है। यह संवाद-शैली में, गुरु और शिष्य के बीच, अद्वैत दर्शन के सार को प्रस्तुत करता है। ‘सव्याख्यः’ का अर्थ है ‘व्याख्या सहित’। इस संस्करण में मूल संस्कृत श्लोकों के साथ उनकी विस्तृत व्याख्या भी दी गई है। पुस्तक में विवेक, वैराग्य, आत्मा-अनात्मा का भेद, और ‘ब्रह्म सत्यं जगन्मिथ्या’ जैसे सिद्धांतों को स्पष्ट रूप से समझाया गया है। इसका एकमात्र लक्ष्य साधक को आत्म-ज्ञान और मोक्ष की ओर प्रेरित करना है। यह वेदांत के जिज्ञासुओं के लिए एक अनिवार्य और आधारभूत कृति है।
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