इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
श्री योग दर्शन’ महर्षि पतंजलि द्वारा रचित ‘योग सूत्र’ पर आधारित एक सम्मानजनक ग्रंथ है। इसे ‘अष्टांग योग’ का शास्त्र भी कहा जाता है, क्योंकि इसमें योग के आठ अंगों – यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि – का व्यवस्थित वर्णन है। यह पुस्तक योग को केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि मन को नियंत्रित करने और आत्म-साक्षात्कार प्राप्त करने का एक संपूर्ण विज्ञान और दर्शन मानती है। यह चित्त की विभिन्न वृत्तियों (विचारों) का विश्लेषण करती है और उन्हें शांत करने के लिए व्यावहारिक और मनोवैज्ञानिक तकनीकें प्रदान करती है, ताकि व्यक्ति अपने सच्चे, आनंदमय स्वरूप में स्थित हो सके।
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