इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
सिद्धान्त तत्त्वविवेक’ अद्वैत वेदांत परंपरा का एक ग्रंथ है, जिसका श्रेय स्वामी निश्चलदास को दिया जाता है। यह कृति ‘विचार सागर’ जैसे उनके अन्य ग्रंथों की तरह, अद्वैत दर्शन के मूल सिद्धांतों का एक व्यवस्थित और तार्किक विवेचन प्रस्तुत करती है। ‘तत्त्व विवेक’ का अर्थ है सत् (वास्तविक) और असत् (अवास्तविक) के बीच भेद करने की क्षमता। इस ग्रंथ में ब्रह्म, जीव, और जगत के स्वरूप का विश्लेषण करते हुए यह स्थापित किया गया है कि एकमात्र ब्रह्म ही परम सत्य है और जगत मिथ्या है। इसका उद्देश्य साधक को आत्म-ज्ञान के माध्यम से मोक्ष प्राप्त करने में मदद करना है।
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