इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह ग्रंथ आचार्य अकलंक देव द्वारा रचित जैन न्याय (तर्कशास्त्र) के महत्वपूर्ण ग्रंथ ‘सिद्धिविनिश्चय’ पर आचार्य अनंतवीर्य द्वारा लिखी गई एक टीका (commentary) है। ‘सिद्धिविनिश्चय’ में प्रमाण, नय और अन्य दार्शनिक अवधारणाओं के माध्यम से आत्मा और अन्य तत्वों की सिद्धि की गई है और अन्य दर्शनों की मान्यताओं का खंडन किया गया है। अनंतवीर्य की यह टीका अकलंक देव के गूढ़ और तार्किक सूत्रों को और अधिक स्पष्टता और विस्तार से समझाती है, जिससे यह जटिल ग्रंथ न्यायशास्त्र के अध्येताओं के लिए सुगम हो जाता है।
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