इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह 8वीं शताब्दी के महान बौद्ध दार्शनिक आचार्य शांतिरक्षित द्वारा रचित एक monumental ग्रंथ ‘तत्त्वसंग्रह’ का पहला भाग है। इस विश्वकोशीय कृति में शांतिरक्षित ने उस समय के भारत में प्रचलित लगभग सभी दार्शनिक सिद्धांतों (हिंदू, जैन, और अन्य) की एक-एक कर के विस्तृत और तार्किक समीक्षा की है और बौद्ध दृष्टिकोण से उनका खंडन किया है। यह भारतीय दर्शन के इतिहास और विभिन्न मतों को समझने के लिए एक अद्वितीय और अमूल्य ग्रंथ है।
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