इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
“तत्त्वानुशासन” जैन दर्शन का एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है, जिसकी रचना आचार्य रामसेन ने की होगी। जैसा कि शीर्षक से स्पष्ट है, यह ‘तत्वों’ (वास्तविकता के मूल सिद्धांतों) पर एक ‘अनुशासन’ (ग्रंथ या विवेचन) है। यह कृति जैन तत्वमीमांसा के प्रमुख विषयों, जैसे- जीव, अजीव, और मोक्ष के मार्ग (सम्यक् दर्शन, सम्यक् ज्ञान, सम्यक् चारित्र) की एक व्यवस्थित और तार्किक व्याख्या प्रस्तुत करती है। इसका उद्देश्य साधक को आत्म-स्वभाव और पर-पदार्थों के बीच भेद-ज्ञान कराकर उसे मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर करना है। यह ग्रंथ आत्मा की शुद्धि और कर्म-बंधन से मुक्ति पर जोर देता है, जो जैन अध्यात्म का केंद्रीय लक्ष्य है।
फ़ॉर्मेट बदलना
क्या आपको यह फ़ाइल किसी दूसरे फ़ॉर्मेट में चाहिए? इसके लिए आप iLovePDF का इस्तेमाल कर सकते हैं, जो एक बहुत अच्छा ऑनलाइन टूल है।
ई-रीडर पर भेजें
आप Amazon की “Send to Kindle” जैसी फ्री सर्विस का इस्तेमाल करके आसानी से फ़ाइल को अपने डिवाइस पर भेज सकते हैं।
कोई दिक्कत आ रही है?
चेक करें कि आपके ई-रीडर का सॉफ्टवेयर अपडेटेड है। यदि फ़ाइल खराब हो या न खुले, तो कृपया उसे पुनः डाउनलोड करें। फिर भी समस्या हो तो हमसे संपर्क करें।