इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
शैव-उपनिषदः’ उन उपनिषदों का एक संग्रह है जो मुख्य रूप से भगवान शिव को परम ब्रह्म के रूप में प्रतिष्ठित करते हैं। हालांकि प्रमुख 10-12 उपनिषद अद्वैत वेदांत पर केंद्रित हैं, बाद के काल में विभिन्न संप्रदायों ने अपने-अपने दार्शनिक सिद्धांतों के समर्थन में उपनिषदों की रचना की। इस संग्रह में ‘कैवल्य’, ‘अथर्वशिर’, ‘श्वेताश्वतर’ और ‘रुद्रहृदय’ जैसे उपनिषद शामिल हो सकते हैं। ये उपनिषद शैव धर्म के दार्शनिक आधार, जैसे कि पति (शिव), पशु (जीव), और पाश (बंधन) के सिद्धांत, पशुपति के रूप में शिव की अवधारणा, और मोक्ष प्राप्ति के साधन के रूप में शिव-भक्ति और ज्ञान की विवेचना करते हैं।
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