इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
यह पुस्तक “त्रिपुरारहस्य” नामक प्रसिद्ध तांत्रिक और अद्वैत वेदांत ग्रंथ का एक विश्लेषणात्मक अध्ययन है। “त्रिपुरारहस्य” में दत्तात्रेय और परशुराम के संवाद के माध्यम से देवी त्रिपुरसुंदरी की उपासना और सर्वोच्च ज्ञान के रहस्यों को समझाया गया है। यह कृति मूल ग्रंथ का केवल अनुवाद नहीं करती, बल्कि उसके तांत्रिक पहलुओं का विश्लेषण करती है। इसमें श्रीविद्या साधना, चक्रों का symbolism, और तंत्र की दार्शनिक अवधारणाओं को आधुनिक दृष्टिकोण से समझने का प्रयास किया गया है। यह उन साधकों और शोधकर्ताओं के लिए उपयोगी है जो त्रिपुरारहस्य के गूढ़ सिद्धांतों को एक व्यवस्थित और विश्लेषणात्मक ढांचे में समझना चाहते हैं।
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