इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह ‘उपनिषद् दर्शन’ का एक ‘रचनात्मक सर्वेक्षण’ प्रस्तुत करने वाली एक दार्शनिक कृति है। यह केवल उपनिषदों की पारंपरिक व्याख्या नहीं करती, बल्कि उनके मूल विचारों को एक नए और रचनात्मक दृष्टिकोण से देखती है। इसमें उपनिषदों के विभिन्न दार्शनिक सिद्धांतों का विश्लेषण किया गया है और समकालीन जीवन तथा दर्शन के लिए उनकी प्रासंगिकता और महत्व को उजागर करने का प्रयास किया गया है।
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