इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह एक ऐतिहासिक शोध-ग्रंथ है, जो ‘उत्तर भारत’ में ‘जैन धर्म’ के इतिहास, उसके प्रसार और उसकी विरासत का अध्ययन करता है। इसमें प्राचीन काल से लेकर मध्यकाल तक उत्तर भारत के विभिन्न क्षेत्रों में जैन धर्म की स्थिति, प्रमुख जैन केंद्र, शासकों द्वारा दिए गए संरक्षण, और यहाँ की कला तथा साहित्य में जैन धर्म के योगदान का विस्तृत वर्णन है। यह क्षेत्रीय इतिहास के माध्यम से जैन धर्म का एक महत्वपूर्ण विश्लेषण प्रस्तुत करता है।
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