इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
श्रीपाद दामोदर सातवळेकर द्वारा लिखित यह पुस्तक वेदों में निहित चिकित्सा ज्ञान पर प्रकाश डालती है। यह दर्शाती है कि आयुर्वेद का मूल स्रोत वेद ही हैं। इस ग्रंथ में वेदों, विशेषकर अथर्ववेद के उन मंत्रों और सूक्तों का विश्लेषण किया गया है जिनमें विभिन्न रोगों के कारण, उनके निवारण के उपाय, जड़ी-बूटियों का वर्णन और स्वास्थ्य-रक्षा के नियम दिए गए हैं। यह पुस्तक प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धति की वैज्ञानिकता और समग्र दृष्टिकोण को उजागर करती है, जो केवल रोग का नहीं, बल्कि रोगी का उपचार करने पर बल देती है। यह वैदिक ज्ञान के एक महत्वपूर्ण पहलू को प्रस्तुत करती है।
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