इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
श्रीपाद दामोदर सातवळेकर द्वारा प्रस्तुत यह ग्रंथ ‘अथर्ववेद’ के ‘ब्रह्मविद्या’ से संबंधित प्रकरणों पर एक गहन भाष्य है। अथर्ववेद, चार वेदों में से एक, में व्यावहारिक ज्ञान के साथ-साथ गूढ़ आध्यात्मिक ज्ञान का भी भंडार है। ‘ब्रह्मविद्या’ का अर्थ है ब्रह्म (परम सत्य) का ज्ञान। यह पुस्तक अथर्ववेद के उन मंत्रों और सूक्तों की व्याख्या करती है जो आत्मा, परमात्मा, ब्रह्मांड और मोक्ष के रहस्यों को उजागर करते हैं। पहला भाग इस गहन विषय की नींव रखता है, जो पाठकों को वैदिक आध्यात्मिक चिंतन की गहराई से परिचित कराता है।
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