इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
वेदान्त परिभाषा’ सत्रहवीं शताब्दी के विद्वान धर्मराज अध्वरीन्द्र द्वारा रचित अद्वैत वेदांत का एक महत्त्वपूर्ण ‘प्रकरण ग्रंथ’ (परिचयात्मक ग्रंथ) है। यह कृति अद्वैत वेदांत में प्रयुक्त प्रमुख पारिभाषिक शब्दों और अवधारणाओं को स्पष्ट और व्यवस्थित रूप से परिभाषित करने के लिए प्रसिद्ध है। इसमें प्रमाण (ज्ञान के स्रोत), विशेष रूप से प्रत्यक्ष, अनुमान, उपमान, अर्थापत्ति, अनुपलब्धि और शब्द प्रमाण, की विस्तृत व्याख्या की गई है। अपनी तार्किक सटीकता और स्पष्टता के कारण, यह ग्रंथ अद्वैत वेदांत के अध्ययन में प्रवेश करने वाले छात्रों के लिए एक मानक पाठ्यपुस्तक बन गया है।
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