इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
यह एक संस्कृत दार्शनिक ग्रंथ का शीर्षक है, जो एक विशिष्ट संरचना को दर्शाता है। इसका अर्थ है, “यह ग्रंथ ‘विवेकार्थप्रकाशिका’ नामक टीका से युक्त है”। ‘उपेतः’ का अर्थ है ‘सहित’ या ‘युक्त’। इसका मतलब है कि इसमें एक मूल ग्रंथ है, और साथ में उस पर ‘विवेकार्थप्रकाशिका’ (अर्थ के विवेक को प्रकाशित करने वाली) नामक एक व्याख्या भी दी गई है। यह व्याख्या मूल ग्रंथ के गूढ़ और संक्षिप्त कथनों के अर्थ को खोलती है, उस पर उठने वाली शंकाओं का समाधान करती है, और उसके दार्शनिक सिद्धांतों को स्पष्ट रूप से प्रकाशित करती है। यह गंभीर अध्येताओं के लिए एक संपूर्ण अध्ययन सामग्री प्रस्तुत करती है।
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